हमारे देश के जवान सीमा पर पाकिस्तान के खिलाफ डट कर लड़ते हैं ताकि हम चैन से सो सके । तो क्या हम अपने देश के जवानों और देश की आर्थिक व्यवस्था में सुधार लाने के लिए विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार नहीं कर सकते ?? जब हमारे देश को चीन के समर्थन की जरुरत थी (उरी हमला), तब चीन ने पाकिस्तान का साथ देकर आतंकवाद को बढ़ावा दिया । ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है की हम चीनी सामानों का बहिष्कार कर स्वदेशी सामानों को अधिक से अधिक अपनाएँ। ऐसा करने से हमारे देश की उन्नति होगी और तभी हम आगे बढ़ पाएंगे। चीन, सबसे ज्यादा हमारे देश भारत से ही कमाता है और हमें ही आँखें दिखाता है, लेकिन इसके जिम्मेदार भी तो हम भारतीय ही हैं ।

Vishnu Conchमेरी दृष्टिकोण से, हम चीनी वस्तुओं का बहिष्कार कर के सीमा पर शहीद हुए जवानों को श्रृद्धांजली अर्पित कर सकते हैं !

भारत को स्वतंत्र कराने में “स्वदेशी आंदोलन” का महत्वपूर्ण योगदान है । यह आंदोलन भारत को विकासशील और आर्थिक रूप से बलशाली बनाने के लिए महात्मा गाँधी जी द्वारा शुरू किया गया था । इस आंदोलन की रणनीति ब्रिटिश उत्पादों का पूर्ण बहिष्कार एवं स्वदेशी उत्पादों को अपनाना था। तो क्या आज फिर से हमने विदेशी उत्पादों को अपना कर देश के विकास में बाधा डाल दिया है ?? यह विषय गंभीरता से विचार करने योग्य है । हमें ये निश्चय करना होगा की हमें स्वदेशी अपनाना है या विदेशी ??? हमारा एक सही निर्णय हमारे देश को औद्योगिक एवं आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बना सकता है । हमें निश्चय करना होगा की हम “मेड इन इंडिया” उत्पादों को ही अपनाएंगे । “मेड इन इंडिया” से मेरा तात्यपर्य है, ऐसी वस्तुएं जो हमारे देश के कारीगरों ने बनाई है। आईये हम आपको उन कारीगरों के दुनिया से आगाह कराते हैं :

Sampuran 12 Jyotirlinga Chowkiहम आप सबको भारतीय कारीगर और उनके जीवन में आने वाली कठनाइयों से अवगत कराना चाहते हैं । यह सिर्फ एक चर्चा का विषय नहीं है, बल्कि एक गंभीर मुद्दा है जिस पर हमें विचार करना चहिये की, कैसे हमारे ही देश में हमारे कारीगरों को नज़र अंदाज़ किया जा रहा है । इसमें कोई दो राय नहीं है की हमारे भारतीय कारीगरों के काम की तुलना किसी से नहीं की जा सकती । लेकिन उनके गरीब, अनपढ़ एवं आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से उन्हें वो कार्यस्थल नहीं मिल पा रहा जिनके वे हक़दार हैं । इस बात सभी अवगत है की, भारत हस्तशिल्प और कारीगरी के लिए पुरे विश्व में प्रसिद्ध है । हमारे देश का इतिहास गवाह है की किस तरह से भारत की हस्तशिल्प कला पुरे विश्व को अपनी ओर आकर्षित करती है । फिर भी हम भारतीय क्यों इनको अनदेखा कर रहे हैं ?? क्या हम अपने ही कलाकृतियों का सम्मान नही करते ?? आईये हम आपको कुछ हस्तशिल्प एवं कलाकृतियां दिखाते है। फिर आप ही निर्णय लेना की आप किसे अपनाना चाहते हैं स्वदेशी या विदेशी??

Sri Kuber Yantra Chowkiअब आप ही फैसला करें की आप किसे अपनाना चाहते हैं । अगर आप इनमे से कोई भी हस्तशिल्प या कलाकृति ख़रीदते हैं तो इसके लाभ का हिस्सा इन कारीगरों के आर्थिक एवं कार्यस्थल विकास में उपयोग होगा। यही नहीं यह हमारे देश को भी विकासशील से विकसित बनाएगा । आईये साथ मिलकर एक बार फिर से यह निश्चय करें की हम विदेशी वस्तुओ को त्याग कर स्वदेशी अपनाएंगे और देश को उन्नति की ओर बढ़ाएंगे ।